शारदीय नवरात्रि Navratri 2026: अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन कैसे करें?नवरात्रि व्रत का पारायण और कलश विसर्जन कैसे करें?

 

शारदीय नवरात्रि Navratri 2026: घटस्थापना मुहूर्त, नौ देवियों के नाम, रंग और भोग



प्रिय पाठक,

नमस्कार।

मैं आचार्या सांत्वना दत्ता, आज फिर आपके साथ एक महत्वपूर्ण धार्मिक विषय की जानकारी साझा कर रही हूँ।

हिंदू धर्म में नवरात्रि Navratri 2026 का विशेष महत्व है। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं, कलश स्थापना करते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और माता रानी से सुख, शांति, समृद्धि तथा जीवन में शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं।

शारदीय नवरात्रि Navratri 2026 आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है। गुजरात सहित देश के अनेक हिस्सों में इन दिनों गरबा, दुर्गा पूजा और देवी आराधना का विशेष उत्साह रहता है।

इस पोस्ट में आप जानेंगे:

  • शारदीय नवरात्रि Navratri 2026 कब से शुरू हो रही है?
  • घटस्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है?
  • कलश स्थापना कैसे करें?
  • नौ दिनों में किस देवी की पूजा होती है?
  • माता रानी को किस दिन कौन-सा भोग लगाएँ?
  • नवरात्रि के नौ दिनों के रंग कौन-से हैं?
  • अष्टमी, नवमी और कन्या पूजन कब करें?
  • नवरात्रि व्रत का पारायण और विसर्जन कैसे करें?
  • नवरात्रि में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

1. शारदीय नवरात्रि 2026 कब से शुरू हो रही है?

(Shardiya Navratri 2026 Kab Se Shuru Hai?)

शारदीय नवरात्रि सामान्यतः सितंबर-अक्टूबर के महीनों में मनाई जाती है। इस वर्ष नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार से होगी और नौ दिनों की देवी आराधना 19 अक्टूबर तक चलेगी। 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। 

नवरात्रि के दौरान माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। प्रत्येक स्वरूप शक्ति, साहस, संयम, करुणा और आध्यात्मिक उन्नति जैसे गुणों की प्रेरणा देता है।

नवरात्रि Navratri 2026 के पहले दिन घटस्थापना की जाती है। इसके बाद भक्त नौ दिनों तक अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ तथा व्रत करते हैं।

2. कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त कब है?

(Navratri Kalash Sthapana Shubh Muhurat 2026)

नवरात्रि Navratri 2026 के पहले दिन कलश स्थापना या घटस्थापना का विशेष महत्व माना जाता है। इसे देवी आराधना के आरंभ का प्रतीक माना जाता है।

अहमदाबाद, गुजरात के स्थानीय पंचांग के अनुसार 11 अक्टूबर 2026 के घटस्थापना मुहूर्त इस प्रकार हैं।

विवरणशुभ समय
घटस्थापना की तारीख             11 अक्टूबर 2026, रविवार
प्रातःकालीन घटस्थापना मुहूर्तसुबह 6:35 से 10:29 बजे तक
अभिजीत मुहूर्तदोपहर 12:03 से 12:50 बजे तक

प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात लगभग 9:19 बजे शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात लगभग 9:30 बजे समाप्त होगी।

ध्यान दें कि मुहूर्त शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए अपने शहर के पंचांग से समय की पुष्टि अवश्य करें।

3. कलश स्थापना कैसे करें?

(Navratri Kalash Sthapana Kaise Karen?)

नवरात्रि Navratri 2026 के पहले दिन कलश स्थापना करने के लिए सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके माँ दुर्गा की पूजा की तैयारी करें।

कलश स्थापना की सामग्री



  • मिट्टी का पात्र और साफ मिट्टी
  • जौ के बीज
  • तांबे, पीतल या मिट्टी का कलश
  • स्वच्छ जल
  • आम के पत्ते या परंपरा के अनुसार उपयुक्त पत्ते
  • नारियल
  • लाल चुनरी या वस्त्र
  • मौली या कलावा
  • रोली, कुमकुम और अक्षत
  • सिक्का और साबुत सुपारी
  • फूल, माला और दीपक
  • धूप, घी और रुई की बत्ती
  • फल, मिठाई और नैवेद्य

पूजा सामग्री में क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है।

कलश स्थापना की विधि

पहला चरण — पूजा स्थल तैयार करें

अपने मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें। एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ और माँ दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।

दूसरा चरण — जौ बोएँ

एक मिट्टी के पात्र में साफ मिट्टी भरें और अपनी परंपरा के अनुसार जौ के बीज बो दें। नवरात्रि के दौरान जौ के अंकुर निकलना वृद्धि और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

तीसरा चरण — कलश तैयार करें

कलश को साफ करके उसमें जल भरें। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार अक्षत, सुपारी और सिक्का डाल सकते हैं। कलश के बाहरी भाग पर रोली या कुमकुम से स्वस्तिक बनाएँ और मौली बाँधें।

चौथा चरण — नारियल स्थापित करें

कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और उसके ऊपर लाल चुनरी में लिपटा नारियल स्थापित करें। इसे अपनी परंपरा के अनुसार करें।

पाँचवाँ चरण — माँ दुर्गा का आह्वान करें

दीपक जलाएँ, पुष्प अर्पित करें और माँ दुर्गा के मंत्रों का जाप करें। आप श्रद्धापूर्वक “जय माता दी” का स्मरण करते हुए भी पूजा कर सकते हैं।

छठा चरण — पूजा का संकल्प लें

नवरात्रि के नौ दिनों में अपनी क्षमता के अनुसार पूजा, पाठ, व्रत और सेवा करने का संकल्प लें।

यदि आप अखंड ज्योति जलाते हैं, तो उसकी सुरक्षित व्यवस्था करें और उसे बिना निगरानी के न छोड़ें।

4. नवरात्रि के नौ दिनों में किस देवी की पूजा होती है?

(Navratri 9 Days Devi Names and Puja)

नवरात्रि Navratri 2026 के नौ दिन माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित हैं। प्रत्येक दिन एक स्वरूप की पूजा की जाती है।

दिनांकदेवी का स्वरूपपूजा का भाव
11 अक्टूबरमाँ शैलपुत्रीस्थिरता और शक्ति
12 अक्टूबरमाँ ब्रह्मचारिणीतप और संयम
13 अक्टूबरमाँ चंद्रघंटासाहस और निर्भयता
14 अक्टूबरमाँ कूष्मांडासृजन और ऊर्जा
15 अक्टूबरमाँ स्कंदमातामातृत्व और करुणा
16 अक्टूबरमाँ कात्यायनीशक्ति और आत्मविश्वास
17 अक्टूबरमाँ कालरात्रिभय पर विजय
18 अक्टूबरमाँ महागौरीशांति और पवित्रता
19 अक्टूबरमाँ सिद्धिदात्रीसिद्धि और आध्यात्मिक उन्नति

यह तालिका नौ देवियों के क्रम के अनुसार है। इस वर्ष अष्टमी और नवमी से संबंधित पूजा-व्रत 19 अक्टूबर को पड़ सकते हैं; इसलिए कन्या पूजन, हवन और पारायण की तिथि अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार तय करें।

5. किस दिन माँ दुर्गा को कौन-सा भोग लगाएँ?

(Navratri 9 Days Bhog List)

नवरात्रि Navratri 2026 में माँ दुर्गा को फल, मिठाई, दूध से बनी वस्तुएँ और अन्य नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। अलग-अलग दिनों के लिए विशेष भोग चढ़ाने की परंपरा भी प्रचलित है।

नीचे सामान्य रूप से प्रचलित भोग की सूची दी गई है।



दिनदेवीपरंपरागत भोग के उदाहरण
पहला दिनमाँ शैलपुत्रीगाय के घी से बना नैवेद्य
दूसरा दिनमाँ ब्रह्मचारिणीमिश्री, शक्कर या फल
तीसरा दिनमाँ चंद्रघंटादूध या दूध से बनी मिठाई
चौथा दिनमाँ कूष्मांडामालपुआ या अन्य मिठाई
पाँचवाँ दिनमाँ स्कंदमाताकेला या अन्य फल
छठा दिनमाँ कात्यायनीशहद या मिठाई
सातवाँ दिनमाँ कालरात्रिगुड़ या गुड़ से बनी वस्तु
आठवाँ दिनमाँ महागौरीनारियल या नारियल से बनी मिठाई
नौवाँ दिनमाँ सिद्धिदात्रीहलवा, पूरी, चना या अन्य नैवेद्य

कुछ धार्मिक मान्यताओं में इन भोगों को अलग-अलग आध्यात्मिक फल से जोड़ा जाता है। हालाँकि, भोग की परंपरा क्षेत्र और परिवार के अनुसार बदल सकती है। किसी विशेष भोग को किसी समस्या के समाधान की गारंटी नहीं मानना चाहिए।

यदि आप हर दिन अलग भोग तैयार नहीं कर पाते, तो अपनी सुविधा के अनुसार फल, मिठाई या सात्त्विक नैवेद्य अर्पित कर सकते हैं। माँ की पूजा में श्रद्धा और भाव को विशेष महत्व दिया जाता है।

6. नवरात्रि के नौ दिनों में कौन-से रंग के वस्त्र पहनें?



(Navratri 9 Days Colours 2026)

नवरात्रि  Navratri 2026 के दौरान अलग-अलग दिनों में विशेष रंगों के वस्त्र पहनने की परंपरा प्रचलित है। कुछ भक्त देवी को उसी रंग की चुनरी या वस्त्र अर्पित करते हैं और स्वयं भी उस रंग के कपड़े पहनते हैं।

नीचे एक प्रचलित रंग-सूची दी गई है। अलग-अलग पंचांगों और क्षेत्रीय परंपराओं में रंग बदल सकते हैं।

दिनांकदेवीप्रचलित रंग
11 अक्टूबरमाँ शैलपुत्रीपीला
12 अक्टूबरमाँ ब्रह्मचारिणीहरा
13 अक्टूबरमाँ चंद्रघंटाभूरा या ग्रे
14 अक्टूबरमाँ कूष्मांडानारंगी
15 अक्टूबरमाँ स्कंदमातासफेद
16 अक्टूबरमाँ कात्यायनीलाल
17 अक्टूबरमाँ कालरात्रिनीला
18 अक्टूबरमाँ महागौरीगुलाबी
19 अक्टूबरमाँ सिद्धिदात्रीबैंगनी या जामुनी

इन रंगों को धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा के रूप में अपनाएँ। पूजा के लिए किसी विशेष रंग का वस्त्र उपलब्ध न हो, तो सामान्य स्वच्छ वस्त्र पहनकर भी श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है।

7. नवरात्रि Navratri 2026 के नौ दिनों में क्या करना चाहिए?

(Navratri Mein Kya Karna Chahiye?)

नवरात्रि  Navratri 2026 में पूजा-पाठ के साथ अपने व्यवहार, विचार और दिनचर्या पर भी ध्यान देना अच्छा माना जाता है।

1. माँ दुर्गा की नियमित पूजा करें।

प्रतिदिन दीपक जलाकर पुष्प अर्पित करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार देवी मंत्र या स्तुति का पाठ करें।

2. दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

यदि समय और सुविधा हो, तो दुर्गा चालीसा, देवी कवच या दुर्गा सप्तशती का पाठ कर सकते हैं। अपनी क्षमता के अनुसार पाठ चुनें।

3. सात्त्विक भोजन अपनाएँ।

व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा के अनुसार फलाहार या व्रत का भोजन कर सकते हैं। व्रत न रखने वाले भक्त भी सामान्य सात्त्विक भोजन के साथ पूजा कर सकते हैं।

4. सेवा और सहायता करें।

जरूरतमंदों को भोजन कराना, किसी की सहायता करना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार सेवा करना भी अच्छा कार्य है।

5. क्रोध और कटु वाणी से बचने का प्रयास करें।

नवरात्रि आत्मसंयम और आत्मचिंतन का अवसर भी है। दूसरों के प्रति सम्मान, करुणा और सद्भाव बनाए रखना चाहिए।

6. अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखें।

नौ दिनों का व्रत रखना सभी के लिए अनिवार्य नहीं है। भक्त अपनी सुविधा और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत रख सकते हैं या केवल पूजा-पाठ कर सकते हैं।

8. नवरात्रि में कौन-से काम करने से बचना चाहिए?

(Navratri Mein Kya Nahi Karna Chahiye?)

नवरात्रि Navratri 2026 के दौरान कुछ परिवार विशेष नियमों का पालन करते हैं। ये नियम पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

  1. यदि आपने व्रत या कोई धार्मिक संकल्प लिया है, तो उसके नियमों का पालन करने का प्रयास करें।
  2. व्रत के दौरान अपनी परंपरा के अनुसार मांसाहार और मदिरा से परहेज करें।
  3. प्याज और लहसुन न खाने की परंपरा हो, तो उसी के अनुसार भोजन तैयार करें।
  4. पूजा स्थल को स्वच्छ रखें और वहाँ पुराने फूल या अनुपयोगी सामग्री जमा न होने दें।
  5. अपशब्द, कटु व्यवहार और अनावश्यक विवाद से बचने का प्रयास करें।
  6. बाल या नाखून काटने से संबंधित पारिवारिक मान्यता हो, तो उसका पालन अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार करें।

इन बातों को धार्मिक अनुशासन की परंपरा के रूप में समझें। इन्हें न मानने पर अनिवार्य रूप से कोई अनिष्ट होगा, ऐसा भय पैदा करना उचित नहीं है।

9. अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन कैसे करें?

(Navratri Kanya Pujan Vidhi 2026)

नवरात्रि Navratri 2026 में अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन करने की परंपरा है। छोटी कन्याओं को देवी के स्वरूप के रूप में सम्मान दिया जाता है। कई परिवारों में एक बालक को भैरव स्वरूप मानकर भी भोजन कराया जाता है।

कन्या पूजन की सामान्य विधि इस प्रकार है:

  1. घर और पूजा स्थल को स्वच्छ करें।
  2. कन्याओं का आदरपूर्वक स्वागत करें।
  3. अपनी परंपरा के अनुसार उनके पैर धोएँ या सम्मानपूर्वक आसन पर बैठाएँ।
  4. माथे पर तिलक लगाएँ और भोजन अर्पित करें।
  5. हलवा, पूरी, चना या अन्य सात्त्विक भोजन अपनी सुविधा के अनुसार परोसें।
  6. अपनी सामर्थ्य के अनुसार फल, उपहार या दक्षिणा दें।
  7. अंत में माता रानी का स्मरण करें और सभी के सुख-स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।

कन्या पूजन में बच्चों की गरिमा, सुविधा और सहमति का ध्यान रखना चाहिए।

कन्या पूजन कब करें?

इस वर्ष 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी दोनों से संबंधित पूजा का पालन हो सकता है। इसलिए अपने स्थानीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार कन्या पूजन का समय तय करें।

10. नवरात्रि व्रत का पारायण और कलश विसर्जन कैसे करें?

(Navratri Vrat Paran and Kalash Visarjan Vidhi)

नवरात्रि  Navratri 2026 के व्रत का पारायण अलग-अलग परिवारों में अष्टमी या नवमी को किया जाता है। कुछ लोग नवमी की पूजा के बाद व्रत खोलते हैं, जबकि कुछ परिवार दशमी पर पारायण करते हैं।

सामान्य रूप से पारायण की प्रक्रिया में निम्नलिखित बातें शामिल हो सकती हैं:

  • देवी की पूजा और आरती करें।
  • अपनी परंपरा के अनुसार हवन या दुर्गा पाठ का समापन करें।
  • कन्या पूजन करें, यदि यह आपके परिवार की परंपरा है।
  • माँ दुर्गा से पूजा में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
  • अपने व्रत के नियम के अनुसार पारायण करें।

कलश और जौ का विसर्जन

नवरात्रि Navratri 2026 की पूजा पूरी होने पर कलश और जौ का विसर्जन परिवार की परंपरा के अनुसार किया जाता है।

  1. माँ दुर्गा की अंतिम पूजा और आरती करें।
  2. कलश को श्रद्धापूर्वक हटाएँ।
  3. कलश के जल का उपयोग अपनी परंपरा के अनुसार करें, जैसे पौधों में डालना, जहाँ उपयुक्त हो।
  4. जौ के अंकुरों को भी परंपरा के अनुसार सम्मानपूर्वक विसर्जित करें या उपयोग करें।
  5. पूजा सामग्री को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से निस्तारित करें।

नारियल, सिक्के या अन्य पूजन सामग्री को रखने की पारिवारिक परंपरा हो, तो उसके अनुसार करें। विसर्जन की विधि सभी जगह एक जैसी नहीं होती।

11. नवरात्रि में माता रानी की सवारी का क्या महत्व है?

(Maa Durga Ki Sवारी 2026)



धार्मिक परंपराओं में नवरात्रि Navratri 2026 के दौरान माँ दुर्गा के आगमन और प्रस्थान की सवारी का विशेष उल्लेख मिलता है। अलग-अलग सवारी को प्रतीकात्मक अर्थों से जोड़ा जाता है।

इस वर्ष माँ दुर्गा के हाथी पर आगमन की मान्यता प्रचलित है। हाथी को कई परंपराओं में वैभव, स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

हालाँकि, देवी की सवारी से जुड़े अर्थ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें भविष्य की घटनाओं की निश्चित भविष्यवाणी नहीं समझना चाहिए।

12. नवरात्रि से जुड़े सामान्य सवाल

प्रश्न 1: क्या नवरात्रि Navratri 2026 के नौ दिन व्रत रखना जरूरी है?

उत्तर: नहीं। आप अपनी श्रद्धा, स्वास्थ्य और सुविधा के अनुसार व्रत रख सकते हैं या बिना व्रत के भी माँ दुर्गा की पूजा कर सकते हैं।

प्रश्न 2: क्या बिना कलश स्थापना के माँ दुर्गा की पूजा कर सकते हैं?

उत्तर: हाँ। यदि किसी कारण से कलश स्थापना संभव नहीं है, तो अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार माँ दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति के सामने पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

प्रश्न 3: नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाना जरूरी है?

उत्तर: अखंड ज्योति जलाना एक प्रचलित परंपरा है, लेकिन यह सभी परिवारों के लिए अनिवार्य नहीं है। दीपक जलाते समय आग से सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।

प्रश्न 4: नवरात्रि में कौन-सा मंत्र जप सकते हैं?

उत्तर: अपनी श्रद्धा के अनुसार “ॐ दुं दुर्गायै नमः” मंत्र का जाप कर सकते हैं। नियमित जाप में श्रद्धा और एकाग्रता बनाए रखने का प्रयास करें।

प्रश्न 5: नवरात्रि Navratri 2026 का समापन कब होगा?

उत्तर: नौ दिनों की देवी आराधना 19 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। अष्टमी, नवमी, पारायण और विसर्जन की विधि स्थानीय पंचांग और परंपरा के अनुसार तय करें।

निष्कर्ष

नवरात्रि माँ दुर्गा की आराधना के साथ-साथ आत्मसंयम, भक्ति, सेवा और सकारात्मक संकल्प का पर्व है। इन नौ दिनों में माँ के नौ स्वरूपों का स्मरण करके हम अपने जीवन में साहस, धैर्य, करुणा और विवेक जैसे गुणों को अपनाने की प्रेरणा ले सकते हैं।

पूजा अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार करें। किसी नियम का पालन न कर पाने पर भयभीत होने के बजाय भक्ति, सद्भाव और अच्छे आचरण पर ध्यान दें।

माँ दुर्गा आप सभी के जीवन में सुख, शांति, शक्ति और सद्बुद्धि प्रदान करें।

जय माता दी! 🙏

आपको माँ दुर्गा का कौन-सा स्वरूप सबसे प्रिय है? कमेंट में जय माता दी लिखकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करें और इस जानकारी को अपने परिवार तथा मित्रों के साथ साझा करें।


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पहले कुंडली को समझिए, फिर उपाय कीजिए।

धन्यवाद।

आचार्या सांत्वना दत्ता
VedVaiiAstro


  1. शारदीय नवरात्रि 2026 तारीख — Shardiya Navratri 2026 Date

  2. नवरात्रि 2026 कब से शुरू है — Navratri 2026 Start Date

  3. घटस्थापना मुहूर्त 2026 — Ghatasthapana Muhurat 2026

  4. कलश स्थापना मुहूर्त 2026 — Kalash Sthapana Muhurat 2026

  5. नौ देवियों के नाम — 9 Names of Durga

  6. नवरात्रि के नौ दिन के रंग — Navratri 9 Days Colours

  7. नवरात्रि में किस दिन कौन सा भोग — Navratri 9 Days Bhog

  8. माता रानी की सवारी 2026 — Maa Durga Sawari 2026


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