शादी कब होगी? जीवनसाथी कैसा होगा? जानें सप्तम भाव का रहस्य

सप्तम भाव ( 7th house ) से जानें शादी कब, कहाँ और कैसी होगी | Marriage Astrology Guide


प्रिय पाठक ,

नमस्कार।

सप्तम भाव में ग्रहों से जीवनसाथी का स्वभाव और विवाह योग



आज मैं बहुत ही अच्छे विषय बारे में बात करें। आज इस पोस्ट में बहुत ही सामान्य सवाल जब कन्या और बालक बड़े हो रहे है तो उनके मन में शादी से जुड़े कई सवाल होते है क्यों न हो। शादी ( marraige) के ऐसा पवित्र बंधन है और उस बंधन में जीवन भर साथ जीना है तो मन में सवाल आयेंगें ही।


शादी के उम्र बच्चों की होते ही लड़के -लड़की के मन में बहुत सारे सवाल उठने लगता है जैसे :-

1) जीवनसाथी ( spouse) का स्वभाव कैसा होगा?
2) आर्थिक स्थिति कैसी होगी? 3) रूप-रंग और व्यक्तित्व कैसा होगा?
4) परिवार और संस्कार कैसे होंगे? 5) शादी दूर होगी या पास?
6) विवाह किस दिशा में होगा?
7) शादी किस उम्र में होगी?

इन सभी प्रश्नों के उत्तर ज्योतिष में सप्तम भाव (7th house) से देखे जाते हैं। सबसे पहले आप सब अपनी कुंडली निकल लीजिये और सप्तम भाव को चेक करना है क्यूकि ज्योतिष में सप्तम भाव से ही विवाह के किसी भी सवाल को समझा जा सकता है।  



सबसे पहले आप लोग ये जाने कि कुंडली के कौन से भाव को सप्तम भाव कहते है :-
सप्तम भाव में ग्रहों से जीवनसाथी का स्वभाव और विवाह योग

जीवन साथी (spouse )कैसा होगा ?

आज मैं सप्तम भाव के बारे में बात करेंगे । चाहे लड़का हो या लड़की दोनों की ही कुंडली में सप्तम भाव उसके जीवन साथी का भाव होता है । सप्तम भाव ( 7th house )में उपस्थित ग्रह से पता चलता है की जीवन साथी कैसा होगा ।

ज्योतिष में यदि आपके सप्तम भाव में एक से अधिक ग्रह है तो उसका प्रभाव अलग होता है ।
सप्तम भाव पर शुभ ग्रहों या पाप ग्रहों की दृष्टि, युति आदि का भी प्रभाव रहता है ।

परंतु ये विश्लेषण एक ग्रह पर आधारित है । चलिए जानते है : यदि सप्तम भाव में

सप्तम भाव में सूर्य ( Sun Placement)

यदि कुंडली में सूर्य सप्तम भाव में स्थित होने से जातक का पति/पत्नी गौरा, कामी तथा क्रोधी स्वभाव का होगा । जातक या जातिका का कम बाल हो सकते है। जातक महत्वकांछी , विचारों से स्वतंत्र और राजसी गुण वाला हो सकता है। जातक - जातिका अच्छे कुल या उच्च कुल के हो सकते है।

सप्तम भाव में चंद्रमा (Moon Placement)

यदि कुंडली के सप्तम भाव में चंद्रमा स्थित हो तो जातक का लड़का -लड़की

सप्तम भाव में बुध ( Mercury Placement)

यदि कुंडली में सप्तम भाव में बुध स्थित हो तो जातक का पति/पत्नी बुद्धिमान , गुणवान और होशियार होता है।

सप्तम भाव में मंगल ( Mars Placement)

यदि कुंडली के सप्तम भाव में मंगल स्थित हो तो जातक की पति/पत्नी स्वभाव से कठोर , आलसी और बोलने में चतुर होते है ।

सप्तम भाव में गुरु ( Jupiter Placement )

यदि कुंडली के सप्तम भाव में गुरु हो तो जातक की पति/पत्नी दीर्घायु, राजा सदृश , धनी और कामी होती है ।

सप्तम भाव में शुक्र ( Venus Placement )

यदि कुंडली के सप्तम भाव में शुक्र हो तो जातक की पति/पत्नी तेजवान , हसमुख , चतुर और धनवान होता है ।

सप्तम भाव में शनि ( Saturn Placement )

यदि कुंडली के सप्तम भाव में शनि हो तो जातक की पति/पत्नी उम्र में बड़ा और चंचल और होता है ।

सप्तम भाव में राहु/केतु ( Rahu and Ketu Placement)

यदि कुंडली के सप्तम भाव में राहु/केतु हो तो जातक की पति/पत्नी मलिन बुद्धि वाला होता है ।

जैसा कि मैंने पहले ही कहा है कि एक से अधिक ग्रह और दृष्टि , ग्रहों का उच्च होने से गुण , स्वभाव के फल में परिर्वतन होता है ।


शादी( Marriage )किस दिशा ( Direction )में होगी ?


ज्योतिष आपको आपके या आपके बच्चों की शादी किस दिशा में हो सकती है बता सकते है आपके जन्म स्थान से । चलिए जानते है :-

सप्तम भाव ( 7th house) में स्थित राशि से विवाह का दिशा ज्ञात किया जाता है । सप्तम भाव में यदि

  1. मेष, सिंह, धनु → पूर्व दिशा
  2. वृषभ, कन्या, मकर → दक्षिण दिशा
  3. मिथुन, तुला, कुंभ → पश्चिम दिशा
  4. कर्क, वृश्चिक, मीन → उत्तर दिशा

यदि सप्तम भाव खाली हो, तो शुक्र से सातवाँ भाव गिनकर दिशा देखी जाती है । 
अब एक नियम है कि यदि कोई भी ग्रह सप्तम भाव में कोई ग्रह नहीं है तब  शुक्र कुंडली में जहां हो वह से सात घर गिनना है और सप्तम भाव में जो  राशि आएगी उस राशि के दिशा में शादी होगी ।
कुंडली का सबसे बलवान ग्रह की दिशा में भी शादी होती है । 

शादी कितनी दूरी पर होगी? (Marriage Distance)


ज्योतिष आपकी शादी आपके जन्म स्थान से कितनी दूरी पर होगा ये ज्ञात भी किया जा सकता है ।

चलिए इस रोचक विषय को भी जानते है :-

सप्तम भाव में कौन से राशि स्थित है उससे जन्म स्थान से विवाह कितनी दूरी में होगा जाना जा सकता है।

  1. मेष, कर्क, तुला, मकर → 200 किमी के अंदरवृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ → 90 किमी के आसपास
  2. मिथुन, कन्या, धनु, मीन → 80–100 किमी
  3. मिथुन, कन्या, धनु, मीन → 80–100 किमी

यदि सप्तमेश 7वें और 12वें भाव के बीच संबंध बनाए, तो विवाह विदेश या जन्मस्थान से दूर हो सकता है।
नोट : विदेश का मतलब सिर्फ यूरोप या अमेरिका नही होता । आप अपने कल्चर रीति रिवाज , भाषा से दूर जाए ये भी विदेश ही है आज भी बहुत लोग मिलेंगे जो आज भी ये बोलते है हम देश जा रहे है चाहे गर्मी की छुट्टी हो या किसी भी प्रकार का छुट्टी होने पर वो देश जाते है ।
जब ज्योतिष लिखी गई थी तब एक स्थान से दूसरे स्थान जाना विदेश जाने से कम नहीं था ।
परंतु आपकी कुंडली में विदेश जाना यूरोप और अमेरिका जाना लिखा है तो आप जरूर जायेंगें ।

शादी कब होगी? (Marriage Timing)

जैसा हम अब तक जान चुके है कि शादी से जुड़ी सभी जानकारी के लिए सप्तम भाव को ही देखना है ।

सप्तम भाव में स्थित ग्रह विवाह की संभावित आयु का संकेत देते हैं

बुध → कम उम्र में विवाह चंद्र → लगभग 22 वर्ष शुक्र → लगभग 25 वर्ष गुरु → 27–28 वर्ष शनि → देरी से विवाह

आप की विवाह उम्र हो गयी है और गुरु का गोचर (transit ) आपके जन्म कुंडली से लग्न ,  तृतीये , पंचम , सप्तम नवम  एकादश में आता है तो उस वर्ष शादी का योग बनता है।  

नोट : शनि , राहु और केतु की दृस्टि सप्तम भाव पर या सप्तम भाव में होने से शादी में देरी भी हो सकती है या शादी  नहीं होने का भी योग होता है ।  

जीवनसाथी की आर्थिक स्थिति कैसी होगी?

गुरु (Jupiter)
यदि सप्तम भाव में गुरु हो या सप्तम भाव का संबंध गुरु से बने तो जीवनसाथी आर्थिक रूप से मजबूत, सम्मानित और समृद्ध हो सकता है। गुरु धन, ज्ञान और विस्तार का कारक माना जाता है।

शुक्र (Venus)
शुक्र शुभ स्थिति में हो तो जीवनसाथी सुख-सुविधा पसंद, आर्थिक रूप से संतुलित और luxurious जीवन जीने वाला हो सकता है।

सूर्य (Sun)
सूर्य मजबूत हो तो जीवनसाथी प्रतिष्ठित, उच्च पद या सरकारी क्षेत्र से जुड़ा हो सकता है।

 बुध (Mercury)
बुध का प्रभाव हो तो जीवनसाथी business minded, communication या व्यापार से धन कमाने वाला हो सकता है।

शनि (Saturn)
शनि का प्रभाव होने पर जीवनसाथी मेहनती होता है, धीरे-धीरे धन संचय करता है। प्रारंभ में संघर्ष के बाद स्थिर आर्थिक स्थिति बनती है।

मंगल (Mars)
मंगल का संबंध हो तो तकनीकी क्षेत्र, भूमि, property या engineering से धन मिलने का योग हो सकता है।

राहु (Rahu)
राहु strong हो तो foreign source, technology या unusual field से income हो सकती है।

महत्वपूर्ण संकेत
सप्तम भाव का संबंध 2nd (धन) या 11th (लाभ) भाव से हो तो spouse financially stable हो सकता है।
गुरु, शुक्र और बुध शुभ स्थिति में हों तो आर्थिक स्थिति बेहतर मानी जाती है।
पाप ग्रहों का अधिक प्रभाव होने पर उतार-चढ़ाव संभव है।


उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी।

धन्यवाद
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